" ज़िन्दगी, तुम्हारे लिए!: आज पहली बार

बुधवार, 18 मार्च 2026

आज पहली बार

 मिट्ठू तोता

आज पहली बार

मुझे अफसोस नहीं

अपने सफेद होते बालों का

मुझे झिझक नहीं

किसी के इन्हें देख लेने पर

आज पहली बार टाला है मैंने

अपने बालों का रंगा जाना

आज पहली बार मैं

बहुत शाँत महसूस कर रही हूँ

मन में किचकिचाहट नहीं

क्योंकि कोई हिचकिचाहट नहीं

कितना स्वाभाविक सा है

पचास की उमर में

बालों का सफेद होना

फिर इस स्वाभाविकता का

गला क्यों घोंट रही थी

इतने दिनों से मैं,

‘पचास की उमर

काले बालों में उपस्थिति

झिझक तो इसमें होनी चाहिए थी’

यह प्रश्न क्यों नहीं बना कभी

चर्चा का विषय

कि अधेड़ होते स्त्री-पुरुष भी

बड़े क्यों नहीं होते?

कद न बढ़े

तो लोग लेने लगते हैं विटामिन

बाल न पकें

तो क्यों नहीं ले पाते लोग सीरप?

क्यों नहीं जा पाते डाॅक्टर के पास?

क्यों नहीं दिखा पाते परिपक्वता?


ईश्वर, तुमने बुढ़ापा बनाया ही क्यों

जो इसे छुपाना पड़ा

पिला कर भेजना था तरुणाई का शर्बत


आज पी रही हूँ मैं

सच का घूँट


आज पहली बार

जा रही हूँ मैं लोगों के बीच

इस झिझक के बिना


आज पहली बार

मैं माँ हो गयी हूँ


7 टिप्‍पणियां:

Anita ने कहा…

वाह!! नये जीवन में प्रवेश पर हार्दिक शुभकामनाएँ, वृद्धावस्था तो मन के वृद्ध हो जाने पर होती है, आत्मा चिर युवा है

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर

M VERMA ने कहा…

आज पहली बार
मैं माँ हो गयी हूँ
Wahhh

Subodh Sinha ने कहा…

पके सफ़ेद बाल हों या मन का छिछोरापन, हम इंसानों को इन्हें छुपाने की आवश्यकता विरासत में मिली है।
बहुत सारे कृत्यों को हम सभी जीवनपर्यंत फ़िज़ूल में करते रहते हैं .. बस्स .."देखा-देखी" .. शायद ...
पर बुढ़ापा शरीर को ही मिलता है। इंसान के हौसलों को नहीं। वैसे माँ होने के लिए पचास तक की गिनती आवश्यक तो नहीं।

Bharti Das ने कहा…

बहुत सुंदर

Priyahindivibe | Priyanka Pal ने कहा…

सुंदर

Onkar ने कहा…

सुंदर

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