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सोमवार, 7 सितंबर 2026

इंटरनेशनल लाइफस्टाइल आइकॉन अवार्ड

इंटरनेशनल लाइफस्टाइल आइकॉन अवार्ड

 आलू-प्याज के भाव में बिकती शोहरत और किलो के हिसाब से बँटती 'प्रतिभा'!

अगर आपने सुबह उठकर चाय पी ली है, तो बधाई हो,‌आप भी "इंटरनेशनल लाइफस्टाइल आइकॉन अवार्ड" के हकदार हैं. बस एंट्री फीस जमा कीजिए, चमचमाती ट्रॉफी घर ले जाइए और इंस्टाग्राम बायो में 'अवार्ड विनर' चिपका कर भौकाल टाइट कीजिए. असली टैलेंट गया तेल लेने... जब तक आपकी जेब में दम है, तब तक हर मंच पर आपका ही परचम है. इस वीडियो में देखिए आज के ज़माने के "अवार्ड बाज़ार" की तीखी, कड़वी और मज़ेदार हकीकत. अवार्ड ले लो अवार्ड सटायर Fake awards reality PR and paid awards business Award show comedy roast सोशल मीडिया अवार्ड्स का सच Paid fame vs real talent Bollywood and corporate awards scam वायरल व्यंग्य अवार्ड फंक्शन #AwardLeLoAward #SatireHindi #ViralSatire #AwardScam #FakeAwards #FunnyHindiRoast #SocialMediaReality #ComedyReels #DesiSarcasm #Exposed #TrendingNow #ViralVideoHindi #KalyugPR

गुरुवार, 3 सितंबर 2026

Soulful Highs: The uplifting beats of Bhajan Clubbing

 


Smile. Freedom. Self-Care. ✨
Step into the ultimate vibe where soulful devotion meets electric energy introducing the Maha Combo of Bhajan Clubbing, now taking your beloved kitty party experience online!

Culture is expanding beyond city limits, uniting hearts across the universe. Tune in from anywhere, sing your heart out, recharge your mind, and vibe with a mindful tribe.

What to Expect:
Soulful Highs: The uplifting beats of Bhajan Clubbing
Self-Care & Smiles: Pure community warmth, laughter, and zero-hangover euphoria
Global Connect: Meet like-minded souls from around the world

Event Schedule:
When: Every 2nd & 4th Sunday of the month
Where: Live Online (Join from your comfort zone!)
Spots are limited to keep the energy interactive and personal.
👉 Tap the link to secure your spot:
https://forms.gle/Lgpmd4NfK4NDcF6z9

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गालीबाज





भले ही रास न आता हो

 गालीबाज

तुम्हारे मोम सरीखे कानों को

मगर एक पिघलता हुआ सच है वो

नहीं दिखावा करता

किसी को जबरन माफ करने का 

न हीं इस फिराक में रहता है

कि कोई दुम हिलाए उसके सामने

या फिर मांगे माफ़ी

जो होता है बस वही दिखता है 

घिनौना, वाहियात, लिजलिजा

हराम की नहीं खाता वो

न ही राम की

भुगतान करता है हमको

अपनी असभ्यता का टैक्स

तभी तो बन पाता है बाकी समाज

सभ्य


रविवार, 16 अगस्त 2026

ये पल्लू है

 Saree in your budget

छह गज़ का सूती या रेशमी लिबास नहीं,

ये पल्लू है, कोई साधारण कैनवास नहीं

जब एक स्त्री पहनती है अपनी पसंद की साड़ी,

मानो सँवर जाती है उसकी पूरी दुनिया ही

​कभी माथे का घूँघट बन परंपरा निभाती है,

कभी हौसला बढ़ाती है

रसोई की आँच से लेकर दफ़्तर की फ़ाइलों तक,

ये साड़ी हर किरदार में साथ कदम मिलाती है

​लाल जोड़े में वो नववधू सी अठखेलियाँ करती,

काले शिफॉन में वो रातों की नींदें हरती है

माँ की पुरानी साड़ी से आती है जो भीनी महक,

वो आज भी हमें बचपन के आँगन में ले जाती है

​वो चुन्नटें बनाते हुए उसका आईने को निहारना,

काँधे पर पिन लगाते हुए माथे का बल पकड़ना

हवा में लहराता वो आज़ाद सा पल्लू,

जैसे कह रहा हो आ गया है तूफ़ान से लड़ना

​यह सिर्फ धागों की बुनावट नहीं

अनकहे जज़्बात हैं,

हर रंग में छुपी हुई, एक अलग ही बात है

कुछ सिलवटें हैं संघर्ष की, कुछ रंग हैं खुशियों के,

स्त्री और साड़ी की ये जोड़ी,

सदियों की खूबसूरत सौगात है

सोमवार, 10 अगस्त 2026

एक प्रेयसी का रोष

 









तुम्हारे इन निर्जीव तंत्रों से,

अब मुझे ईर्ष्या सी होने लगी है

मेरे हिस्से का स्पंदन, मेरे हिस्से की भोर,

यह निष्ठुर 'स्क्रीन' हर दिन निगलने लगी है

​तुम कहते हो, "यह हमारे कल के लिए है,"

स्वर्णिम भविष्य की इस क्रूर वेदी पर,

तुमने हमारे हँसते हुए आज को बलिदान किया

यह तो सफलता का अंतहीन मायाजाल है

जिसमें उलझकर,

तुमने उम्रदराज कर दिया

मेरी मौन प्रतीक्षा को.

​देह भले ही समीप होती है मेरे,

पर मन तुम्हारा,

उलझा रहता है इन प्रपंचों में

मेरे उलाहनों की नमी तुम्हें अब नहीं छूती,

तुम्हारा ध्यान बस आभासी बंधनों में बहता है

मेरी छुअन से अधिक

अब तुम्हें कीज खटपट भाती है,

रात के सन्नाटे में मुझे तुम्हारी नहीं,

तुम्हारे काम की आवाज़ सताती है

​मैं तुम्हारी प्रेयसी हूँ,

कोई टू डू लिस्ट नहीं,

जिसे सुविधानुसार तुम

अगले पल पर टाल सको

मैं एक जीवंत प्रेम हूँ,

कोई प्रोजेक्ट नहीं,

जिसे मात्र कुछ खोखले वादों से

तुम सम्भाल सको

मुझे तुम्हारे कैलेंडर के

किसी खाली पन्ने में नहीं सिमटना,

मुझे तुम्हारे जीवन के केंद्र में धड़कना है

​महत्वाकांक्षा की इस अंधी दौड़ में,

जब तुम किसी शिखर पर नितांत अकेले खड़े होगे,

तब मुड़कर मत खोजना मेरी परछाईं को,

क्योंकि तब तक, मेरी आस के सारे पलाश झड़े होंगे

​चुना है तुमने जिस व्यस्तता के आलिंगन को,

वही एक दिन तुम्हें शून्यता का अर्थ बताएगी

आज मेरी जो शिकायतें तुम्हें बेमानी लगती हैं,

याद रखना, कल मेरी मौन विरक्ति

तुम्हें बहुत रुलाएगी


शनिवार, 1 अगस्त 2026

उन्होंने कहा दिन है


सच मत बोलो

सच दुखता है


कहा न...

तुम सुनते ही नहीं


झूठ नहीं बोल सकते

तो चुप रहो


जो सच नहीं सुन सकते

वो चीखेंगे चिल्लायेंगे

लेकिन तुम्हें सच नहीं बोलने देंगे


तुम बात करोगे सड़कों की

वो आंकड़े दिखायेंगे


और हाँ सवाल भी मत करो

सवाल ही तो बवाल है

जो सवाल नहीं करता वो मालामाल है


उन्होंने कहा, दिन है

तुम दिन कहो

ये मत कहो कि सूरज नहीं निकला

सूरज तो बादल में भी नहीं दिखता

क्या उसे रात कह देते हो?

ख़ारिज हो गयी न दलील?


जहाँ ख़ारिज होती रहती हैं बार-बार दलीलें

वहाँ दलील देने वाला ही बन जाता है दलाल

या यों कहें कि बनना पड़ता है दलाल

तो क्या वही बन जाना चाहते हो

फिर क्यों बोलते हो सच


तुम गूंगे ही अच्छे लगते हो

सोमवार, 13 जुलाई 2026

वांगचुक छला जा रहा

स्त्रियों को सदैव भरोसेमंदो ने छला है

यह नहीं कहूँगी

मगर यह भी नहीं कहने जा रही कि

स्त्रियों को सदैव अजनबियों ने छला है


क्योंकि स्त्री ही नहीं

छले तो पुरुष भी गये हैं











KEEP US SAFE GOD!
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छल हमारे बीच पैर पसार चुका है

छल हमारे साथ आ गया है

इस तरह मासूम और अपना बनकर

कि हम ख़ुशी ख़ुशी छलवा लेते हैं ख़ुद को

जब समझ आता है तो छलछला उठते हैं


हम आँख पर पट्टी बाँधकर बैठे हैं

कि वांगचुक छला जा रहा जंतर मंतर पर

सच तो यह है कि 'उस' भीड़ के अलावा

हम सब छले जा रहे

हमारी आत्माओं पर बोझ बढ़ रहा

क्योंकि वो भीड़ हमारे बच्चों के लिए है वहाँ

हम यहाँ छल चुके जाने का आनंद ले रहे

न गुरुत्व बचा है हममें न चेतनता

उस गछ की जड़ बन गये

जो आए दिन गिर रहे चार बूँदें फिसलते ही


कोई और कितना, क्या ही छलेगा

2014 फिर नहीं मिलेगा



मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php