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सोमवार, 7 मई 2018

है ईश अगर मन में तो ये क्या है..

मैं राम कहता हूँ
तो तलवार निकालते हो
मैं अल्लाह भजता हूँ
तो पत्थर मारते हो
मैं बाइबिल पढ़ता हूँ
तो सबक सिखाते हो,
क्या मजहब की परिभाषा
बस तुम्हीं जानते हो?
अरे मजहब कोई ब्रांड नहीं
कि अच्छा या खराब हो,
राम-रहीम सत्ता के कीड़े-मकोड़े नहीं
कि पाँच साल इनको पूजो
फिर वॉक आउट कर जाएं,
ये कोई प्रश्न काल में जागी सत्ता नहीं
कि महत्वहीन हों,
इनकी आवाज हममें और तुममें हैं
ये माइक लेकर नहीं बैठते
कि सामने वाले पर प्रहार कर सकें
और इनका कोई गलियारा भी नहीं
कि वहाँ निकलकर निर्वस्त्र करें
एक-दूसरे को,
ये तो एक आत्मा हैं
हमारे और तुम्हारे अंदर बसी
......
ताकि सच के रास्ते पर चलने का
साहस जुटा सकें,
ताकि प्रलय के दिन हम
नज़रें मिला सकें अपने आप से
उस वक़्त वो ये नहीं पूछेगा
कि मेरे नाम पर कितने लोगों को
जिबह किया?
उसकी आँखों में बस एक ही सवाल होगा
कितने चेहरे उम्मीद की रोशनी में
उजले हुए??
बाहर निकलो अपनी सोच के दलदल से
नज़र उठाकर देखो
मासूमों को,
मज़लूमों को,
शोषितों को,
ज़ुल्म सहने वालों को,
ज़मींदोज़ कर दो उन सबको
जो मानव नहीं,
काले कर दो चेहरे बलात्कारियों के,
अगर साहस है
तो छीन लो
पूंजीपतियों के गुदड़ो में भरा सोना-चांदी
बना दो उसे
गरीब के मुँह का निवाला,
जड़ दो नगीना
गरीब के आँसू का
अगर कर सकते हो तो करो
नहीं तो लानत भेजो खुद पर
क्योंकि जो तुम कर रहे हो
उससे तो अच्छा है
कि कुछ न कर पाने का दंश
तुम्हें निगल जाए
और फिर उगल दे बाहर
एनाकोंडा की तरह,
तड़पने को।

मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php