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शुक्रवार, 27 अगस्त 2021

कच्ची मिट्टी

 कुम्हार चाक पर कच्ची मिट्टी को हाथों की थाप से गढ़ा करता था. उसके बनाये हुए घड़े लोगों में इतने पसंद किए जाते थे कि बिना वजह ही लोग लेते थे. कुछ लोग तो बस देखने ही आते थे. उनकी सबसे बड़ी विशेषता एक ओर झुका होकर भी संतुलन बनाये रखना था. कुम्हार के अंदर न तो गर्व था न ही पैसों का लालच. एक दिन एक गायक उधर से गुजरा उसे भी ये कला पसंद आयी. वो वहीं बैठकर रियाज़ करने लगा.

एक दिन उसने कुम्हार के मन में ये बात डाल दी कि उसके गीतों से ही घड़ों ने संतुलन बनाना सीखा. कुम्हार मुग्ध था गायक पर उसकी बात मानता चला गया. फिर गायक बोला कि सभी के घड़े तो टेढ़े नहीं होते फिर तुम्हारे ही क्यों? कुम्हार को अपनी खासियत ही कमी लगने लगी...गायक को सुनकर उसकी चाक पर हाथों की थाप धीरे धीरे सीधी पड़ने लगी. गायक की रुचि घड़ों में कम हुई वो चला गया और एक दिन सब की रुचि भी...अब कुम्हार घड़े नहीं बनाता गीत गाता है.

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