Coffee with Abhi

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शनिवार, 25 जनवरी 2020

शर्त


नहीं चाहिए थे
तुम्हें हमारे चुम्बन
तो वापिस रख देते
हमारी हथेली पर
क्यों जूठा करने दिया
अपने होंठो पर रखकर?

नहीं चाहिए था
तुम्हें हमारा आलिंगन
तो पीठ फेर लेते
हमारे आने से पहले
क्यों सींचा उसे
अपनी छाती पर रखकर?

नहीं चाहिए था
तुम्हें हमारा स्पर्श
तो उग जाने देते कैक्टस
हमारी त्वचा पर
क्यों छूने दिया अपने रोमछिद्रों को
हमारे शानों पर सर रखकर?

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