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मेरे प्रेम का प्रस्ताव

मेरी प्रेम कविताएँ
बीथोवन के जवाबी ख़त नहीं
जो तुम पुष्टि कर सकोगे
मेरे तुमसे प्रेम में होने की

न ही मैं
ब्राउनिंग की वो पोरफीरिया हूँ
जिसे उसके प्रेमी में
उसी के बालों से फंदा बनाकर
प्रेम में अमरत्व दिया

मेरा अमर प्रेम
दिन में सूरज और रात में चाँद सा है
कैसे इनकार करोगे कि
रात दिनकर का स्वागत न करे
कैसे रोकोगे मुझे कि
तुम्हारी चुपकी की पवित्र नाद से
मन भर की दूरी पर रहूँ?
चाहो तो मेरे प्रस्ताव पर ग़ौर करना
जितनी दूरी पर मैं हूँ तुमसे
इतने दायरे में मुझे हरदम मिलना.

5 comments:

अनीता सैनी said...

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक कीचर्चा शनिवार(२८-०३-२०२०) को "विश्व रंगमंच दिवस-रंग-मंच है जिन्दगी"( चर्चाअंक -३६५४) पर भी होगी।
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
अनीता सैनी

विश्वमोहन said...

तुम्हारी चुपकी की पवित्र नाद से
मन भर की दूरी पर रहूँ?.... वाह! अप्रतिम प्यार!

विश्वमोहन said...

तुम्हारी चुपकी की पवित्र नाद से
मन भर की दूरी पर रहूँ?.... वाह! अप्रतिम प्यार!

Onkar said...

बहुत सुंदर

सु-मन (Suman Kapoor) said...

सुंदर

मेरी पहली पुस्तक

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