Coffee with Abhi

Buy Me a Coffee

शुक्रवार, 27 मार्च 2020

स्त्री

स्त्री
दोपहर को धूप होती है
शाम को परछाई
और रात में अँधेरा.

हर बीता हुआ पुरुष
अपना पहर बदलता रहता है
और लंबा आराम लेता है
अँधेरा गहराते ही,
स्त्री आँखों की पुतलियों में सपने बाँधे
करवटों में रात निकाल देती है
सुबह के अलार्म की प्रतीक्षा में.

कोई टिप्पणी नहीं:

मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php