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रविवार, 10 सितंबर 2023

हमारे रास्ते


यूँ ही अलग अलग रास्तों से
फिर कभी मिल जायेंगे

तुम जम्हाई बोना मेरे चेहरे पर
अपने पास बिठा लेना
हम ख़्वाब में भी बस तुम्हें
हाँ तुम्हें गुनगुनायेंगे

वो जो कविता गायी थी
तुमने एक रोज मेरे लिए,
उसके सुरों से एक सड़क बनायी है
उसके इर्द-गिर्द तन्हाई बिछायी है
हम चलेंगे एक दिन उस सड़क पर
साथ-साथ

यूँ ही अलग अलग रास्तों से
फिर कभी हम मिल जायेंगे

संगीत के सादा नोट की तरह

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मेरी पहली पुस्तक

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