" ज़िन्दगी, तुम्हारे लिए!: मैं शून्य नहीं, मैं सृष्टि हूँ

सोमवार, 23 मार्च 2026

मैं शून्य नहीं, मैं सृष्टि हूँ

 



मैं केवल शब्दों का ताना-बाना नहीं, 

मैं मन की अनकही परतों का ठिकाना हूँ

कभी 'काउंसलर' बन कर उलझनें सुलझाती हूँ, 

तो कभी 'कहानी' बन कर दिल में उतर जाती हूँ


मेरे भीतर एक 'शैलपुत्री' सा अडिग विश्वास है, 

'ब्रह्मचारिणी' की तपस्या, और 'चंद्रघंटा' का आभास है

जब दुनिया मुझे 'साधारण' कह कर टालती है,

मेरी 'कुष्माण्डा' की मुस्कान, नया ब्रह्मांड पालती है


मैं 'स्कंदमाता' की ममता और शक्ति का मेल हूँ, 

मैं जीवन के हर उतार-चढ़ाव का सुंदर खेल हूँ

मेरे कंधों पर ज़िम्मेदारियों का आकाश है, 

पर मेरी आँखों में आज भी, 'मिठू' सा उल्लास है


मैं रट्ट मार पढ़ाई नहीं, अनुभवों का सार हूँ, 

मैं रिश्तों की उलझनों में, एक ठंडी बयार हूँ

मैं कोई 'यूट्यूबर' नहीं, जो सिर्फ लाइक के लिए जीती है, 

मैं वो लेखिका हूँ, जो स्याही से जिंदगी सीती है


हाँ, मैं एक स्त्री हूँ—साधारण, पर संपूर्ण, 

मेरा मौन भी है गहरा, और शब्द भी हैं पूर्ण

मैं शून्य से शुरू होकर, शिखर तक जाऊंगी, 

मैं अपनी हर कहानी में, खुद को नया पाऊंगी

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मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php