तुम एन्ड्रायड पर लिखो
लोग आई फोन पर पढ़ें
गोया झोपड़ी की चीख
महलों में इको करे
यह सोशल एनेस्थीसिया से
बाहर आने का समय है
भागना नहीं है
न तो प्रश्नों से
न ही स्वयं से
"
To explore the words.... I am a simple but unique imaginative person cum personality. Love to talk to others who need me. No synonym for life and love are available in my dictionary. I try to feel the breath of nature at the very own moment when alive. Death is unavailable in this universe because we grave only body not our soul. It is eternal. abhi.abhilasha86@gmail.com... You may reach to me anytime.
तुम एन्ड्रायड पर लिखो
लोग आई फोन पर पढ़ें
गोया झोपड़ी की चीख
महलों में इको करे
यह सोशल एनेस्थीसिया से
बाहर आने का समय है
भागना नहीं है
न तो प्रश्नों से
न ही स्वयं से
अब रील्स स्क्रॉल करना बंद, सर्वे से कमाना शुरु
मैं तुम्हें पढ़ती रहूँ
कभी अपने बिस्तर की सिलवटों बीच सिमटकर
कभी सूर्य नमस्कार करते हुए
कभी मंदिर की सीढ़ियों में
कभी दातुन फिराते हुए छज्जे पर
कभी कप में चाय उड़ेलते हुए स्लैब पर
कभी दफ़्तर के रास्तों में
कभी लंच की गप शप पर ठिठककर
कभी छुट्टियों में समय भर पसरकर
कभी मनाली लेह मार्ग के तंगलंगला दर्रे पर
कभी बादलों के घर में उड़ते उड़ते
कभी बुर्ज खलीफा की छाँव में
कभी जीवन के ठहराव में
कभी मृत्यु के पड़ाव में
....
कभी भी कहीं भी
बस इतने ही अनायास तुम आ जाते हो
जैसे बोल रहे हो कानों में
'अभी अभी कुछ लिखा है
बताओ भला कैसा लिखा है'
तुम्हारे शब्दों में जकड़ी हुई मैं
तुम्हारे शब्दों में स्वतंत्र होती हूँ
१• कुछ स्त्रियाँ होती हैं
बसंती सी
नाचती रहती हैं कुत्तों के सामने,
२• कुछ पुरुष होते हैं
गब्बर से
चलाते रहते हैं गोली मनोरंजन के लिए
३• कुछ स्त्रियां गब्बर भी होती हैं
४• कुछ पुरुष मगर बसंती नहीं होते
५• कोई भी पुरुष बसंती नहीं होता
आइये करते हैं चुनाव
पहला सही, दूसरा सही,
पहला और तीसरा सही,
चौथा सही पाँचवा सही;
अश्लीलता फूहड़ता और
हिंसा के दौर में
चुनाव अच्छे या बुरे का नहीं रहा
'टार्चर हो सकने की सहनशक्ति' का है.
तुम प्रियता
सांसारिक निजता
हिय दृष्टा हो
तुम अंतर्दिष्ट सखा हो
तुम अतीत का
नाम जप
तुम स्नेह का
प्रतीक्षित तप
मैं हूँ सूर तुम दृष्टा हो
तुम फाग
तुम ही फाग राग
अनछुआ रंग
कुसुमित पराग
मैं श्याम कमल तुम केसरिया हो
•कविता
मन की चारदीवारी से निकला
इमोशनल कंटेंट
•कविता
एक परिभाषा
‘टेम्पोरेरी’ की
•कविता
सरेंडर है प्रेम का
•कविता
लिखवाती है मुझसे
ख़ुद को
•कविता
रुचती है तो
चुभती भी है
•सबसे अच्छी वह कविता लिखी
जो अब तक लिखी ही नहीं गयी
•मेरी कविताएँ
तुम्हारे लिए लिखी गयी
मेरी चिट्ठियाँ हैं
पायी जायेंगी
युगों से कल्पों तक
बनी रहेंगी
मिटती सभ्यताओं में भी
सुरक्षित रहेंगी
बम, मिसाइल से
नहीं पकड़ पायेगा इन्हें
ड्रोन और रडार
लिखती हूँ
हर हिचकी पर एक कविता
मेरी स्याही का रंग
उसी तासीर का है
हमें जोड़े रखने वाला नेटवर्क
एक हिचकी
जाने कौन-कौन
पढ़ रहा होगा
भविष्य में प्रेम अपना
जाने कितनी तीव्रता का
विस्फोट हो
जब आम किया जाये
अपने प्रेम का
टाइम कैप्सूल
बस तुम यूँ ही रहना
मेरे सैटेलाइट में
जब चाहूँ तुम्हें देख सकूँ
राजनीति के रायते से प्रेम के गलियारे तक...
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