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जीवित होने का प्रमाण-पत्र

जब हम कुछ नहीं कर रहे होते हैं
तो जीते हैं अपने आप को
एक उस अध्याय को
जिसे कुछ करते हुए
पलट नहीं सकते

जब हम कहीं नहीं होते हैं
तो होते हैं अपने पास
कि औरों के साथ होते हुए
कभी नहीं हो सकते
अपने करीब

जब हम कुछ नहीं बोलते
तो चटते हैं स्वयं को
एक दीमक की मानिंद
खोखला होने तक
जैसे बचेंगे ही नहीं

जाने कैसा मापदण्ड है जीने का
कि कुछ करना
कहीं होना
या फिर बोलते रहना
इतना जरूरी है
जैसे यही हो
जीवित होने का प्रमाणपत्र।

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