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मंगलवार, 24 सितंबर 2019

तुम रोशनी मशाल की

तुम तेज़ हो
तुम ओज हो
तुम रोशनी मशाल की
देखकर तुम्हें, ज़िन्दगी
जी उठी शमशान की
स्वप्न एक कच्ची उमर का
उतावला जो कर गया
भाल पर बांधे कफ़न
वो उतर फ़िर रण गया
रात चांदनी, सुबह
वस्त्र बदल अा गई
डूबकर ओज में
तेज में नहा गई.

श्री अमिताभ बच्चन जी को दादा साहब फाल्के पुरस्कार की बहुत बहुत बधाई 🙏

6 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 25 सितंबर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत सुन्दर
सादर

दिगम्बर नासवा ने कहा…

वाह ...
क्या बात ...

मन की वीणा ने कहा…

बहुत शानदार।

Roli Abhilasha ने कहा…

देर से पढ़ने के लिए क्षमा चाहती हूँ.
बहुत आभार आपका 🙏

Roli Abhilasha ने कहा…

देर से पढ़ने के लिए क्षमा चाहती हूँ.
बहुत आभार आपका 🙏

मेरी पहली पुस्तक

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