Coffee with Abhi

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सोमवार, 26 मार्च 2018

हो इश्क़ मुक़म्मल तो जानें

बुलंदियाँ तो इश्क़ की,
नाकामियों में हैं
हम तुम्हारे और तुम हमारे
ये सब समझौते हुआ करते हैं
मुक़म्मल जज़्बात
तो तब हैं
कि
तुम हममें
और हम तुममें रहें।

शुक्रवार, 23 मार्च 2018

शर्त ये है कि...

प्रेम बंटता है अगर
तुममें और हममें
तो बँट जाने दो
मग़र शर्त ये है कि
हम तुम्हें तुम्हारे जैसा
और तुम हमें
हमारे जैसा चाहो।

गुरुवार, 22 मार्च 2018

एक युद्ध स्वयं के विरुद्ध

शहादत पर हर बरस
मेले लगाने से पहले
पूँछ लेना उस माँ से
कैसे कलेजा जला था,
पूँछना हर शमा को
जलाने से पहले
कैसे उस सुहागिन का
सिंदूर मिटा था,
पूँछना ये टूटने से पहले
कहाँ गया उम्मीद बनकर
कलाई पर बहन की
जो धागा बंधा था,
शहादत कोई इनाम नहीं है
शहीद कोई नाम नहीं है
ये तो बस एक दिलासा है
आज कक्षा में
बच्चों को पढ़ाया जाने वाला
एक दिन का सबक,
प्रतिमाओं के आस-पास
चौराहों पर होने वाला
एक आयोजन मात्र,
23 मार्च के नाम पर
सबसे बड़ा भाषण देने वाले
महोदय से
बस एक बार पूंछना होगा
क्या अपने घर में
कोई भगत सिंह देखना चाहेंगे
बजाय अम्बानी, सहारा
सचिन, मोदी के???
आज के भगत सिंह, सुखदेव
और राजगुरु को
एक अघोषित युद्ध लड़ना होगा
स्वयं के विरुद्ध,
भ्रष्टाचार, अनैतिकता
और गन्दी राजनीति के विरूद्ध।

बुधवार, 21 मार्च 2018

शून्य से पहले

दायरारहित सोच के
बाहर का दायरा,
कल्पनारहित उड़ान के
बाद की कल्पना,
दर्दरहित जीवन के
अंत का दर्द,
प्रेमरहित मन के
पतझड़ का प्रेम,
गतिरहित आशा के
स्थिरता की आशा,
पड़ावरहित सफर के
दूरन्त का पड़ाव,
....महज कोरी कल्पनाएं नहीं
ये तो एक विराम है
शून्य है
इसके बाद स्थान लेती है
ऋणात्मकता....
मत जाइए शून्य तक
मत खोजिए नकारात्मकता
जीवन अंटार्कटिका नहीं यूरेशिया है
क्योंकि हर जीव पोलर बियर नहीं
कुछ मानव भी हैं।

सोमवार, 19 मार्च 2018

खुशी बांटते रहिए

मुस्कान मन की आभा है
अधरों पर सजाकर रखिए
हो न ये मन अपनों से खाली
रिश्ते सभी से निभाकर रखिए
ये दुनिया है छोटा घरौंदा हमारा
न टूटे कि इसको बचाकर रखिए
है सुबह जो अपनी तो शाम भी है
रूठे वक़्त से भी अब बनाकर रखिए
साथ चलने से ही तो कारवां बनता है
बांटिए खुशी दर्द को मुस्कराकर रखिए।

20 मार्च: अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस
संयुक्त राष्ट्र संगठन ने वर्ष 2013 में ये दिवस मनाने की घोषणा की। आइये हम सब मिलकर आज का दिन मनाते हैं।

चचा लखनऊ उवाच 1


GOOGLE JI FOTU DIHIN

हमरे चचा केरे चचा केर पिताजी
अपने ग्यारा साल केर लरिकवा 
खातिर बिटेवा देखे गए रहे
तो कहिन
.....देखौ, तुम्हार नौ साल केर
छुई-मुई जैस बिटेवा हमका
नीक लाग।
बस यू बताओ
कि कनकैया मा कन्नी तो
बांध लेत है,
....फिर हमरे
चचा केर पिताजी 
इक्कीस बरस के
चचा खातिर अट्ठारा बरस केरी
चाची पसन्द 
करे गए
....सुनौ, तुमार बिटिया
तनू दूबर है
मुला ठीक है
बस उइका टाई मैहा
गांठ बाँधब आवत है,
अब हम उनतिस
केर हुई चलेन 
नाक, कान गला केर डॉक्टर हन
हमरे पिताजी का
गर्दन बांधे वाली नाई मिल रही


चचा लखनऊ

मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php