Coffee with Abhi

Buy Me a Coffee

सोमवार, 26 मार्च 2018

हो इश्क़ मुक़म्मल तो जानें

बुलंदियाँ तो इश्क़ की,
नाकामियों में हैं
हम तुम्हारे और तुम हमारे
ये सब समझौते हुआ करते हैं
मुक़म्मल जज़्बात
तो तब हैं
कि
तुम हममें
और हम तुममें रहें।

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मेरी पहली पुस्तक

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