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फिर मिलते हैं...

चलो ज़िन्दगी से दरख्वास्त की जाए
जगते रहने की इजाज़त दे मुक़म्मल नींद से पहले।

शुभ रात्रि

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न तुम जानो न...

सुख मेरी आँखों का  दुःख मेरे अंतर का  या तुम जानो  या मैं जानूँ, उष्मित होता है जब प्रेम, पिघलती रहती है  भावों की बर्फ  परत दर परत,...