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शुक्रवार, 16 मार्च 2018

दुःख में सत्य चीखता है...

दुःख रात का वो पहर नहीं जहाँ नितांत अंधेरा है
दुःख तो वो पल है जब आपके कदम ठहर जाएं
दुःख वो कहर नहीं जहाँ उम्मीदें टूटती हैं
दुःख तो वो जहर है जिसे पीकर आप उम्मीद करना छोड़ दें
दुःख बियाबान जंगल नहीं
दुःख तो वो छाँव है जहाँ आप दिशा भटक जाएं
दुःख वो नहीं जो किसी के चले जाने पर हो
दुःख तो किसी के साथ होते हुए भी न अपनाने पर है
दुःख वो नहीं जो हताश कर दे
दुःख तो वो है जो आशा को निराश कर दे
दुःख वो नहीं जब अन्न न मिले
दुःख तो वो है कि आपके पास अन्न हो और सेवन न कर सकें
दुःख वो नहीं जब आपके पाँव में जूते न हो
दुःख तो वो है कि जूते पहनने को पाँव न हो।

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