" ज़िन्दगी, तुम्हारे लिए!

रविवार, 26 जुलाई 2020

प्रभु शरण



कि बढ़ चले पुकार पर

त्रिशूल रख ललार पर

जो मृत्यु भी हो राह में

कर वरण तू कर वरण


हो पार्थ सबकी मुक्ति में

रख हौसले को शक्ति में

जो शत्रु को पछाड़ दें

वो तेरे चरण, तेरे चरण


जब तेरे आगे सर झुकें

हाथ कभी रिक्त मिलें

बाधाओं से टकरा के

बन करण तू बन करण


पछाड़ दे तू हर दहाड़

ऐसी हो तेरी हुँकार

चीर किसी द्रोपदी का

ना हो हरण, ना हो हरण


न हो जटिलता का अंत

बस मौन रहे दिग-दिगन्त

हो पथ का भार तेरे सर

प्रभु शरण ले प्रभु शरण

शहादत!


'चांद आज साठ बरस का हो गया' इतना कहकर पापा ने ईंट की दीवार पर पीठ टिकाते हुए मेरी आंखों में कुछ पढ़ने की कोशिश की...
'लेकिन मेरा चांद तो अभी एक साल का भी नहीं हुआ है' कहते हुए मैं पापा से लिपट गई.
मेरी आंखों से रिस रहे आंसू बीते समय को जी रहे हैं. रोज शाम हम घर की छत पर होते हैं तीन महीने से हर रोज पापा छत पर एक तारे को अपने बेटे का नाम देते हैं और मैं अपनी मां का.
तिरंगे से लिपट कर एक लाश अाई थी और जाते वक़्त दो अर्थी उठी थीं. जिसे शहादत कहते हो आप सब वो वीरानी बनकर चीखती है. थर्राती है सन्नाटों में.

बुधवार, 22 जुलाई 2020

Thanks giving



Thank you so much my dear and near friends from Russia, Romania, United States, Germany, Canada, Japan, United Kingdom and Hong kong. 
These today's stats in this picture are taken from my blog.

मास्क वाला प्रेम



चलो न

खुले में प्रेम करते हैं

सूरज की रोशनी

जहाँ ठहर जाए ऊपर ही,

जैसे प्रेम के देवता ने

अपने पंख फैलाकर

हमें दे दी हो

हमारे हिस्से की छाँव;

ऐसा करते हैं न

रख देते हैं एक मास्क

उजास के चेहरे पर

और जी लेते हैं प्रेम भर तम.

रविवार, 19 जुलाई 2020

शब्द ही शिव हैं


शब्द ही शिव हैं
कभी प्रेम के रचे जाते हैं
कभी उद्वेग
तो कभी अंत के.

आच्छादित करते हैं
मन की तृष्णा को
समय के बहाव
और नदी के वेग को.

है शब्द का अमरत्व ये
कर में सरल है
दिमाग में भुजंग हैं
मन में महत्वहीन बन जाते हैं.


कविता का शीर्षक माननीय अनूप कमल अग्रवाल जी "आग" के शब्दों से उद्धत है 🙏


मंगलवार, 7 जुलाई 2020

हिसाब बराबर



मेरे कंधे पर चुप्पियाँ बिठाकर जब-जब वो बटोरने जाता है उसके कंधे के लिए तितलियाँ... मुझमें प्रेम दोगुना हो जाता है...प्रेम और प्रेम के लिए की गयी ईर्ष्या.

अब मैं भी थमा दिया करूँगी उसकी यादों को ख़ामोशी. कुछ भी हो प्रेम तो बने रहने देना है न!

मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php