Coffee with Abhi

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मंगलवार, 21 मार्च 2023

चाय के बहाने प्यार

आओ उफानते हैं
केतली भर प्यार आज
कविता दिवस के दिन
तुम मेरी बाहों में सोना
मैं सर रख लूँगी अपना
तुम्हारे सीने पर,
उबलते रहेंगे
हम दोनों के मन देर तक
पका लेंगे उसमें
प्यार, नोकझोंक,
तकरार की मीठी बातें
और छान लेंगे
एक दूसरे के मन में;
कड़वाहटें अलग करके

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2023

इंसान बनना है मुझे

माँ ने कृतज्ञ होना सिखाया

और यह भी सिखाया कि

नदी, वृक्ष, प्रकृति की तरह बनो

देना सीखो,

पशुओं की तरह बनो

अनुगामी रहो

अब उलझन में हूँ मैं

क्या इंसान नहीं बन सकती!

एक और सुझाव मिला

गीता का सार समझो,

ईश्वर कहता है

….

कदाचित कुछ नहीं कहता ईश्वर

अलावा इसके कि

कर्म प्रधान रहे

निर्णय स्वयं से हो और

संतुलन बना रहे

शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

पीनट बटर

जाड़ों की दोस्त मूँगफली और

मूंगफली का दोस्त पीनट बटर

अगर करते हो ज्यादा चटर पटर

तो आजमा कर देखो एक बार


*पीनट बटर*

Health Matters


बुधवार, 31 अगस्त 2022

हाँ, साहस है मुझमें

क्यों बनूँ मैं प्रेम में अमृता
और ओढ़ लूँ 
उस प्रेम की उतरन
जो किसी ने किसी से किया...
आज कोई ले मेरी प्रेम रज
और माथे रखकर कहे
'मुझे स्नेह पगी अभिलाषा स्वीकार है'
हाँ, मुझमें साहस है 
प्रेम में अभिलाषा बनने का
...और उससे एक दिन नहीं मिलूँगी मैं
मिलती रहूँगी आँखें पनीली होने तक
जैसे साँझ से मिलती है रात.

शनिवार, 6 अगस्त 2022

मेरा मरना

समय का सिंगारदान
काला हो चला है
सूख रही है मेरे कलम की स्याही
लिखने की मेज पर पड़ा
कप का निशान मिटता ही नहीं
मां कहती है,
मैं ज्यादा चाय पीने से मरूंगी
कितनी भोली है मां,
आज तक शायद ही
कोई डेथ सर्टिफिकेट बना हो
जिस पर मृत्यु का कारण
चाय पीना अंकित है,
जब इतने दर्द में जी गयी
मैं तो ज़हर से भी न मरूं;
मैं जब भी मरूंगी
आत्मा की भूख से मरूंगी...

मंगलवार, 2 अगस्त 2022

तिरंगा

 बचपन से ही मुझे केसरिया रंग प्रिय रहा. तब जबकि देशभक्ति का अभिप्राय नहीं मालूम था. उस रोज जब काकू को गाड़ी से उतारा जा रहा था तब भी मुझे इस रंग से कोई शिकायत नहीं हुई. काकी को चूड़ियाँ तोड़ते देख मेरे अंदर से कोई जय हिंद बोला था.
ये वैधव्य क्या कहूँ इसे... ये सावन है एक सच्चे सिपाही की प्रेमिका का. मेरे मन ने २१ तोपों की सलामी देते हुए काकी को बस इतना ही समझाया..."तेरी इन चूड़ियों के हरे रंग से ही तो तिरंगा बनता है."

शुक्रवार, 29 जुलाई 2022

दूरी

निश्चय ही कोई पूर्व वाला  तड़पा होगा
किसी उत्तर वाले से मिलने को 
और बनी होगी पूर्वोत्तर रेलवे 
इस तरह मिटायी होगी दूरी 
दो दिशाओं के मध्य;
क्यों नहीं आता मेरा मन 
ऐसी ही किसी गाड़ी पर बैठकर 
जो देश,  काल,  समय न मानती हो

मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php