" ज़िन्दगी, तुम्हारे लिए!

रविवार, 25 जून 2023

जिज्ञासा

रात क्या है?
शाम की पाती
जो सुबह तक
ख़ुद ही
चलकर आती

सुबह क्या है?
ईश्वर के
विश्वास का
टूटता हुआ तारा

विश्वास क्या है?
किसी की
परेशानी सुनकर
हाथों का यकायक
एक-दूसरे से जुड़ जाना

हाथ क्या है?
हमारी मौजूदगी का
विस्तार
जिसके भीतर
दुनिया है हमारी

दुनिया क्या है?
उम्र क़ैद
काटने के लिए
गुजर करने को
मिली जगह

उम्र कैद क्या है?
विंडो सिल पर
कप के
निशान के भीतर
जमी हुई धूल

चाय क्या है?
मैं और मेरे तुम,
मौन सा झरका,
बिछड़ने से
ठीक पहले की मिठास

प्रेम क्या है?
किसी अछूत द्वारा
मंदिर के भीतर
लगे घंटे का
पहला स्पर्श

स्पर्श क्या है?
वह पल जब
अलग हो रहा होता है 
माँ की गर्भनाल से
कोई शिशु

मंगलवार, 21 मार्च 2023

चाय के बहाने प्यार

आओ उफानते हैं
केतली भर प्यार आज
कविता दिवस के दिन
तुम मेरी बाहों में सोना
मैं सर रख लूँगी अपना
तुम्हारे सीने पर,
उबलते रहेंगे
हम दोनों के मन देर तक
पका लेंगे उसमें
प्यार, नोकझोंक,
तकरार की मीठी बातें
और छान लेंगे
एक दूसरे के मन में;
कड़वाहटें अलग करके

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2023

इंसान बनना है मुझे

माँ ने कृतज्ञ होना सिखाया

और यह भी सिखाया कि

नदी, वृक्ष, प्रकृति की तरह बनो

देना सीखो,

पशुओं की तरह बनो

अनुगामी रहो

अब उलझन में हूँ मैं

क्या इंसान नहीं बन सकती!

एक और सुझाव मिला

गीता का सार समझो,

ईश्वर कहता है

….

कदाचित कुछ नहीं कहता ईश्वर

अलावा इसके कि

कर्म प्रधान रहे

निर्णय स्वयं से हो और

संतुलन बना रहे

शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

पीनट बटर

जाड़ों की दोस्त मूँगफली और

मूंगफली का दोस्त पीनट बटर

अगर करते हो ज्यादा चटर पटर

तो आजमा कर देखो एक बार


*पीनट बटर*

Health Matters


बुधवार, 31 अगस्त 2022

हाँ, साहस है मुझमें

क्यों बनूँ मैं प्रेम में अमृता
और ओढ़ लूँ 
उस प्रेम की उतरन
जो किसी ने किसी से किया...
आज कोई ले मेरी प्रेम रज
और माथे रखकर कहे
'मुझे स्नेह पगी अभिलाषा स्वीकार है'
हाँ, मुझमें साहस है 
प्रेम में अभिलाषा बनने का
...और उससे एक दिन नहीं मिलूँगी मैं
मिलती रहूँगी आँखें पनीली होने तक
जैसे साँझ से मिलती है रात.

शनिवार, 6 अगस्त 2022

मेरा मरना

समय का सिंगारदान
काला हो चला है
सूख रही है मेरे कलम की स्याही
लिखने की मेज पर पड़ा
कप का निशान मिटता ही नहीं
मां कहती है,
मैं ज्यादा चाय पीने से मरूंगी
कितनी भोली है मां,
आज तक शायद ही
कोई डेथ सर्टिफिकेट बना हो
जिस पर मृत्यु का कारण
चाय पीना अंकित है,
जब इतने दर्द में जी गयी
मैं तो ज़हर से भी न मरूं;
मैं जब भी मरूंगी
आत्मा की भूख से मरूंगी...

मंगलवार, 2 अगस्त 2022

तिरंगा

 बचपन से ही मुझे केसरिया रंग प्रिय रहा. तब जबकि देशभक्ति का अभिप्राय नहीं मालूम था. उस रोज जब काकू को गाड़ी से उतारा जा रहा था तब भी मुझे इस रंग से कोई शिकायत नहीं हुई. काकी को चूड़ियाँ तोड़ते देख मेरे अंदर से कोई जय हिंद बोला था.
ये वैधव्य क्या कहूँ इसे... ये सावन है एक सच्चे सिपाही की प्रेमिका का. मेरे मन ने २१ तोपों की सलामी देते हुए काकी को बस इतना ही समझाया..."तेरी इन चूड़ियों के हरे रंग से ही तो तिरंगा बनता है."

मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php