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Saza-e-zindagi


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न तुम जानो न...

सुख मेरी आँखों का  दुःख मेरे अंतर का  या तुम जानो  या मैं जानूँ, उष्मित होता है जब प्रेम, पिघलती रहती है  भावों की बर्फ  परत दर परत,...