Coffee with Abhi

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रविवार, 25 फ़रवरी 2018

Teen sher

बड़ी बेतरतीब सी है ये किताब ज़िन्दगी की
चलो हर एक पन्ने से सिलवटें हटा दी जाएं।

सोते हैं तो आँखों में मख़मली ख्वाब लेकर,
हर सुबह की नवाज़िश है काँटों का गुलाब

काश कि तुम भी पलटते इक बार मेरी जानिब,
इक शबीह* के दीदार में यूँ मैं शज़र* तो न होता

शबीह-तस्वीर
शज़र-वृक्ष

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मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php