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बुधवार, 25 अगस्त 2021

चिड़िया, पेड़ और प्रेम

चिड़िया पेड़ के प्रेम में इतनी मशगूल थी कि अपने पंख भूलती रही. पेड़ उसे सर्दी, गर्मी, बारिश से बचाता. अपने पत्तों की छाँव में आसरा देता. उसकी कोपलें चिड़िया को दुलारतीं. बहुत ख़ुश हुई चिड़िया और पेड़ को भी अच्छा लगा क्योंकि अब तक उसके पास सब अपने लिए आते थे मगर पहली बार चिड़िया पेड़ के लिए थी वहाँ. वो भी बहुत सारे प्यार के साथ. दोनों के प्रेम की चर्चा होने लगी. भौंरा, तितली, हवा, पर्वत सब दोनों को अलग करने की युक्ति सोचते. अब पेड़ को भी लगने लगा ये सही नहीं. चिड़िया पेड़ से और ज़्यादा प्रेम करने लगी. एक दिन एक चिड़ा ने पेड़ से मित्रता कर ली. पेड़ ने चिड़िया का भविष्य उस चिड़े के साथ सोच लिया. आकंठ पेड़ के प्रेम में डूबी चिड़िया और प्रेम करने लगी. पेड़ को उदासीन देख उसका प्रेम वेदना में बदल गया. सारे पंख झड़ गए. प्रेम की पुजारिन चिड़िया ने पेड़ की बात मानने की हामी भर दी. चिड़े के साथ पहली उड़ान भरे इससे पहले ही वो जमीन में आ गिरी. उसे पेड़ की आगोश में ज़मींदोज़ कर दिया गया.

आज तक वो पेड़ ख़ामोश खड़ा है. उसकी आवाज़ चिड़िया की मृत देह 

2 टिप्‍पणियां:

आलोक सिन्हा ने कहा…

अच्छा सृजन है ।

Roli Abhilasha ने कहा…

धन्यवाद!

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