कोई कुछ भी कहता रहे
मग़र माँ तो बस माँ होती है,
नाराज हो कितनी या खुशी में हो
बच्चों में तो बस उसकी जान होती है,
लोगों के कैसे सवालों से टकराती है
इतनी कमजोर क्यों है दिखती
नहीं ये बता पाती है,
चाहत है हमेशा रहें
उसकी पलकों की छांव में
जरा सी दूरी से मन ये तड़प जाता है
रोती रहती है मगर खुद को
न समझा पाती है,
रखके कलेजे पे पत्थर विदा कर ही देती
दिल की ममता न एक पल को
भुला पाती है,
अभी कल की ही बात है
नन्ही सी उंगली थामी थी
बहुत भारी मन से गले से लगाकर
अच्छे-बुरे सारे सबक समझाकर
पहला अनुभव लेने को जमाने का
उन कदमों की हलचल स्कूल में उतारी थी,
जुदा होते हुए वो सिसकता रहा अंदर
'माँ यहीं बैठी रहना'
कहकर तड़पता रहा अंदर,
जाते हुए थामकर जल्लादों का हाथ
पीछे मुड़कर वो देखे
और मैंने जाने कितनी बलाएं उतारी थीं,
आंख में आँसू भरकर
दो कदम भी चलना आसान नहीं था
मैं जिसे छोड़कर जा रही थी
वो मेरा जिगर था
कोई सामान नहीं था,
मेरे लिए वो रास्ता कठिन हो चला था
कैसे तय करती उस सफर को
नहीं कुछ सूझ रहा था,
हरी घास पर वो दो घण्टे बिताने को सोचे
भाग कर सबसे पहले लिपट जाऊँ मैं
'कहाँ है मेरी माँ'
जब मेरा लाल पूछे,
यूँ तो हरी घास पर मैं चहलकदमी कर रही थी
पर उसकी याद हर पल मेरे दिल पर
कांटे की मानिंद चुभ रही थी,
घड़ी के कांटे भी ठहर से गए थे
वो रुके भी न थे
पर बढ़ ही कहाँ रहे थे,
पानी का घूँट भी अंदर नहीं सरका
कि वो अभी तक है जानता
बस मेरे हाथों का जायका,
क्या खाया होगा कुछ भी तो नहीं
मेरे यहाँ होने का भी क्या फायदा!
To explore the words.... I am a simple but unique imaginative person cum personality. Love to talk to others who need me. No synonym for life and love are available in my dictionary. I try to feel the breath of nature at the very own moment when alive. Death is unavailable in this universe because we grave only body not our soul. It is eternal. abhi.abhilasha86@gmail.com... You may reach to me anytime.
सोमवार, 7 मई 2018
मेरे बच्चे का स्कूल में पहला दिन
बुधवार, 2 मई 2018
क्यों चाहते हो फिर भी...
तुम्हें प्यार करने की चाहत
मेरी ज़िंदा रहने की हसरत
मुक़म्मल तो कुछ भी नहीं
क्यों चाहते हो फिर भी
कड़वा ज़हर कहकर
मोहब्बतों को
हलक से उतार लूँ,
मेरे मनाने की आरजू
तुम्हारे आने की जुस्तजू
रहगुज़र तो कुछ भी नहीं
क्यों चाहते हो फिर भी
दिल को अपने
राह-ए-मोहब्बत से मोड़ लूँ,
मैं बैठी हूँ अधूरी सी
सारी बात अनमनी
गम भुलाने को कुछ नहीं
क्यों चाहते हो फिर भी
तुम्हारी याद के नाम
हर सफ़ा उधार दूँ।
सोमवार, 30 अप्रैल 2018
सोमवार, 23 अप्रैल 2018
Happy Birthday Master Blaster
पर आज पहली बार यहाँ लिख रही हूँ
लोग कहते थे तुम पर्याय हो क्रिकेट का
मैं कहती हूँ तुम्हीं तो क्रिकेट हो
तुम्हारे बाद मैंने मैच नहीं देखा
मेरे अंदर वो साहस नहीं था
कि तुम्हें अंतिम पारी में विदाई देती
मुझसे लगातार बोला जा रहा था
कि मैं तुम्हें जाते हुए देखूँ
क्योंकि गुजरांवाला से शुरू हुए तुम्हारे सफर में
मैं अंत से पहले तक गवाह रही,
मेरे अपने जानते थे
आखिरी पारी न देखना
मतलब मैंने क्रिकेट के रूप में तुम्हें
अपने अंदर कहीं रोककर रखा
मैंने इस सच को झुठला दिया
कि तुम अब बल्ला उठाए हुए
कभी मैदान में आते नहीं दिखोगे;
डक हो या शतक, तुम जुनून थे मेरा
पॉपिंग क्रीज़ पर तुम्हारा स्टांस लेना,
फ़ास्ट बॉल को बॉलर के ऊपर से
बाउंड्री पर विदा करना,
बाउंसर को थर्ड मैन फील्डर के ऊपर निकालना
ज़बरदस्त ऑन साइड स्ट्रोक खेलकर
ऑफ साइड उससे भी बेहतर बनाना
पंद्रह ओवर की रिस्ट्रिक्टेड फैल्डिंग का लाभ उठाना
बहुत खीझ होती थी
सिद्धू का मेडेन ओवर निकालकर
तुम्हें इंतज़ार करवाना,
स्क्वायर कट हो या फ्रंट फुट शॉट
तुम तो टूट पड़ते थे गेंद पर,
चतुराई तो जैसे रगों में भरी थी
रिवर्स स्वीप में माहिर थे तुम
पैडल स्वीप के प्रणेता बन गए,
सिक्सर के बाद भी सिंगल की भूख में
रनिंग बिटवीन द विकेट
तो बस कमाल की करी थी,
हर शॉट में तुम्हारा कोई सानी नहीं
तुम्हारे जैसा कोई हीरो नहीं
मेरे जैसी कोई दीवानी नहीं,
वर्ल्ड कप के लिए तुम्हारा डेडिकेशन
और इस सपने का पूरा होना
क्या कहूँ, सब कुछ तो दिया तुमने,
हमारा प्यार, हमारा विश्वास
सम्मान सहित लौटाया तुमने
जिस सफर भी रहो
दुवाएँ लेकर चलो
हमेशा मुस्कराते रहो विध हैप्पी फैमिली
यू, सारा, अर्जुन और प्यारी सी अंजली
IMAGE CREDIT: GOOGLE
रविवार, 22 अप्रैल 2018
स्वर्ग... नर्क के बीच..
कितना मुश्किल होता है
जीते जी किसी को अच्छा कहना
और मरते ही
टैग हो जाता है उसका नाम
स्वर्गीय जैसे शब्द के साथ
ये जाने बगैर
कहीं उसकी आत्मा
नर्क में वास तो नहीं कर रही,
मुझे भी कभी किसी आत्मा के साथ
नारकीय अभिव्यक्ति
या फिर नर्क में होने जैसा महसूस नहीं हुआ;
जाने क्यों इंसान
अपने पास होने वालों की वैल्यू नहीं करता
काश, कि हम अच्छा सोचें!
करें इंसान के साथ इंसान जैसा व्यवहार
परोसें उसकी थाली में
थोड़ा और आदर, थोड़ा और प्यार,
उसकी उम्मीदों पर हाँ की मुस्कान चस्पा करें,
अपनी उपस्थिति से
उसके आसपास खुशियों के गुब्बारे सजाएं,
फ़िर
फ़िक्र नहीं होगी....कि
चील-कौओं को खाना नहीं दिया पितृपक्ष में,
मरने वाले के लिए दुआ नहीं मांगी,
अकेले में पछताना न पड़े;
कि कर नहीं पाए अच्छा कुछ भी उसके साथ
स्वीकार नहीं पाए उसकी अच्छाई भरी सभा में,
स्वर्ग या नर्क के बंटवारे में पड़ने से बेहतर है,
जीते जी स्वर्ग की अनुभूति दान करना
मृत्यु पर बस नहीं पर....
शनिवार, 21 अप्रैल 2018
तू हँसती रहे मुझ पर...
ये रोशनी
ये सवेरा
और अंधेरे में
चमकता हुआ
ये तुम्हारा चेहरा।
वो एक शाम पुरानी सी
लगने लगी है
जैसे एक कहानी सी।
वो किनारे, वो सितारे
और वो एक मैं
जो तेरी आंखों में ढूंढता था सहारे
आज सब खामोश है।
इन खामोशियों के बीच भी
तुम चुपके से आकर
कर जाती हो कई सवाल
मेरी आँखों में ढूँढती हो
उस गुनाह का पश्चात्ताप
जो मैंने कभी किया ही नहीं
और मेरा प्रेम बदहवास सा
तुम्हारी आँखों में मेरा फ़रेब ढूंढता है
ये जानते हुए भी
कि मैंने तो बस प्रेम किया है।
आ जाओ कि इक बार
मेरे दर्द को कफ़न पहना दो
ये मुर्दानगी
ये आँसुओं के सैलाब
मुझसे नहीं जिए जाते
ये पल-पल की तिश्नगी
ये घूँट-घूँट का ज़हर
मुझसे नहीं पिए जाते।
इस कदर पनाह मत देना मेरे दर्द को
कि मैं तेरा आदी हो जाऊँ
तू हँसती रहे बेपनाह मुझ पर
और मैं तेरा फरियादी हो जाऊँ।
मंगलवार, 17 अप्रैल 2018
नारीत्व मेरा अहम है
कभी सिर उठाने की कोशिश करती
तो ये कहकर रोक दिया जाता
लड़की हो तुम
चार लोग देखेंगे तो क्या कहेंगे
फिर भी बेहया समाज से
मुझ अकेले को ही लड़ना पड़ता,
अब मैं बड़ी हो गयी हूँ
मेरे अंदर भी आठ लोग बोलते हैं
भेज दी उस कोमला की मृत देह
उन चार लोगों के काँधों पर
अब मैं काया विहीन
जुल्म के ख़िलाफ़ तांडव करती
एक आत्मा भर हूँ
मेरे नारीत्व को
चुनौती देने की भूल मत करना
यही तो मेरा अहम है,
गर साधारण औरत समझो मुझे
तो ये तुम्हारा वहम है।
मेरी पहली पुस्तक
http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php
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•स्मृति क्या है? °बीते हुए कल के शोर की प्रतिध्वनि •शोर क्यों स्वर क्यों नहीं? °जिस प्रकार हमारी सूक्ष्म देह होती है ठीक उसी प्रकार सूक्ष्म...
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•एक उचाट सा मन लिए कोने कोने घूमता हूँ मैं गैटविक हवाई अड्डा हर गुज़रने वाले चेहरों में ए आई वन सेवन वन के यात्रियों को खोजता हूँ जो उस रोज...
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मुझे भी तुमसे कुछ ऐसा सुनना है जैसे मार्केज़ ने कहा था मर्सिडीज़ से और मैं ख़ुद को उसके बाद झोंकना चाहूँगी इंतज़ार की भट्टी में वह इंतज़ार ज...






