Coffee with Abhi

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शनिवार, 4 सितंबर 2021

सिगरेट चुम्बन है

 हर रात वो

लाइटर की आग से

जलाती है

कागज़ के चंद टुकड़े

और अपने मन को

समझाती है अक्सर

कि उसने जला दी अपनी

अंतिम प्रेम कविता भी;

देर तक काले टुकड़े

हवा में तैरते हैं

और उसे टीसते हैं

सिगरेट से भीगे होंठ.

मंगलवार, 31 अगस्त 2021

लिख दिया

 रेत रेत लिख दिया

देह खेत लिख दिया

उँगलियाँ कलम हुईं

श्याम श्वेत लिख दिया


तार तार मन को जब

प्यार प्यार लिख दिया

दिल के ज़ख़्म में भी

तूने शहरयार लिख दिया


धानी, लहू को करके

दिन का उतार लिख दिया

इतना दिया प्यार तुमने

के कर्जदार लिख दिया

शनिवार, 28 अगस्त 2021

प्रियतम को पहली पाती

बार-बार अधरों की लाली
शर्माती और सकुचाती,
नेह निचोड़ लिखी जब हिय से
प्रियतम को पहली पाती:

मैं अक्षर सारे भूल गयी
संकेत ही बिम्ब बने मन के,
अरज कोई और भावे न
जब बोल बने बसन तन के,
उनके संग को ढूंढ रही
उन ढाई आखर की थाती,
फिर सारा प्रेम उड़ेल लिखी
प्रियतम को पहली पाती:

काया गोकुल मन वृंदावन,
तिरछी मुस्कान है मनभावन,
अँखियाँ बन्द करूँ दिखते
बस उनके नयन लुभावन,
आभा उनकी जिनसे सुंदर
उस चाँद को देखके हर्षाती,
किरणों को कलम बनाय लिखी
प्रियतम को पहली पाती.

शुक्रवार, 27 अगस्त 2021

कच्ची मिट्टी

 कुम्हार चाक पर कच्ची मिट्टी को हाथों की थाप से गढ़ा करता था. उसके बनाये हुए घड़े लोगों में इतने पसंद किए जाते थे कि बिना वजह ही लोग लेते थे. कुछ लोग तो बस देखने ही आते थे. उनकी सबसे बड़ी विशेषता एक ओर झुका होकर भी संतुलन बनाये रखना था. कुम्हार के अंदर न तो गर्व था न ही पैसों का लालच. एक दिन एक गायक उधर से गुजरा उसे भी ये कला पसंद आयी. वो वहीं बैठकर रियाज़ करने लगा.

एक दिन उसने कुम्हार के मन में ये बात डाल दी कि उसके गीतों से ही घड़ों ने संतुलन बनाना सीखा. कुम्हार मुग्ध था गायक पर उसकी बात मानता चला गया. फिर गायक बोला कि सभी के घड़े तो टेढ़े नहीं होते फिर तुम्हारे ही क्यों? कुम्हार को अपनी खासियत ही कमी लगने लगी...गायक को सुनकर उसकी चाक पर हाथों की थाप धीरे धीरे सीधी पड़ने लगी. गायक की रुचि घड़ों में कम हुई वो चला गया और एक दिन सब की रुचि भी...अब कुम्हार घड़े नहीं बनाता गीत गाता है.

बुधवार, 25 अगस्त 2021

चिड़िया, पेड़ और प्रेम

चिड़िया पेड़ के प्रेम में इतनी मशगूल थी कि अपने पंख भूलती रही. पेड़ उसे सर्दी, गर्मी, बारिश से बचाता. अपने पत्तों की छाँव में आसरा देता. उसकी कोपलें चिड़िया को दुलारतीं. बहुत ख़ुश हुई चिड़िया और पेड़ को भी अच्छा लगा क्योंकि अब तक उसके पास सब अपने लिए आते थे मगर पहली बार चिड़िया पेड़ के लिए थी वहाँ. वो भी बहुत सारे प्यार के साथ. दोनों के प्रेम की चर्चा होने लगी. भौंरा, तितली, हवा, पर्वत सब दोनों को अलग करने की युक्ति सोचते. अब पेड़ को भी लगने लगा ये सही नहीं. चिड़िया पेड़ से और ज़्यादा प्रेम करने लगी. एक दिन एक चिड़ा ने पेड़ से मित्रता कर ली. पेड़ ने चिड़िया का भविष्य उस चिड़े के साथ सोच लिया. आकंठ पेड़ के प्रेम में डूबी चिड़िया और प्रेम करने लगी. पेड़ को उदासीन देख उसका प्रेम वेदना में बदल गया. सारे पंख झड़ गए. प्रेम की पुजारिन चिड़िया ने पेड़ की बात मानने की हामी भर दी. चिड़े के साथ पहली उड़ान भरे इससे पहले ही वो जमीन में आ गिरी. उसे पेड़ की आगोश में ज़मींदोज़ कर दिया गया.

आज तक वो पेड़ ख़ामोश खड़ा है. उसकी आवाज़ चिड़िया की मृत देह 

सोमवार, 23 अगस्त 2021

तितिक्षु प्रेमी

मैंने इमरोज़ नहीं चाहा

न ही उसकी पीठ

तुम्हारा नाम उकेरने को,

तुम साहिर भी मत बनना

शायद ही कभी मैं

चूल्हे पर चढ़ा सकूँ

तुम्हारे नाम की चाय

बस यूँ ही बने रहना

मेरी सुबह, मेरी शाम और रात

मेरी आत्मा के साथी.

शनिवार, 21 अगस्त 2021

विवाह से पूर्व

 आज जैसे ही शादी के लिए हाँ बोला मैंने, सभी के चेहरे अचानक खिल उठे. तुम्हारा भी फ़ोन आ गया. बंद थी जो बात इतने दिन से कैसे शुरु कर पाऊँ दोबारा. मन में कुछ नहीं है अब. तुम लोगों ने जो निर्णय लिया और जिस तरह से मेरी स्वीकृति की मुहर लगवायी... मैंने अपनी नियति मान लिया इसे. 


आने वाले सोमवार इंगेजमेंट की रस्म है और हर वक़्त की तरह मेरे मुँह से निकल गया, "जो पसन्द हो बनवा लेना. मुझे तो पहनना ही है बस." तुम सब मुझे शायद आख़री बार 'पागल लड़की' कहकर हँस रहे होगे क्योंकि रस्म की पहली पोशाक पहनने से पहले मुझे अपना मन उतार कर रखना होगा कहीं और...किसी के पास. मुझे ख़ुद पर दुनियादारी का लिबास डालना है.

मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php