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रविवार, 5 सितंबर 2021

आग-- द हीरो ऑफ अन हीरोइक थॉट्स: 3

अब इसे कोरापुट के फिल्मांकन का असर ही कहेंगे कि "मल्हारा" के बहाने सभी अपनी भावनाओं को खंगाल रहे हैं. कौन कहता कि समय के साथ प्रेम मुरझा जाता है ये तो और प्रगाढ़ हो जाता है. प्रेमी हमारा मल्हारा बन जाता है, हृदय का प्रीत राग झंकृत होता है जब उसकी आमद होती है. उस नेह को चूमने अकुलाई बारिश की बूँदे आकर गले लगती हैं.

इस प्रीत राग को शब्द दिए हैं, शब्दों के जादूगर अनूप कमल अग्रवाल "आग" ने. विश्वास नहीं होता कि बरखा और आग का संगम अनवरत चलेगा. लेकिन ये प्रयोग सफल रहा है ये इस गीत की चढ़ती लोकप्रियता बता रही है.

कविराज को गीतकार बनने की बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं!

शनिवार, 4 सितंबर 2021

प्रेम में एकलव्य

 मैंने कभी नहीं सोचा था

मेरे भीतर प्रेम का एकलव्य सर उठायेगा

और मैं तुम्हें सौंपती रहूँगी अपना वादा

फिर एक दिन तुमने कुछ नहीं कहा

और तमाम दिन बीतते रहे

तुमने देने बन्द कर दिए शब्दों के शर

प्रेम में पूर्णता को आहुत होने

मैं तुम्हारे प्रेम की मूर्ति पूजती रही

तुम्हें अपना गुरु मानकर;

नियति ने तुम्हारे मौन को खण्डित किया

"प्रेम में उर्ध्वगामी बनना होगा तुम्हें

तुम मुझसे भी आगे बढ़ो" तुम्हारे आशीर्वचन

मेरा छिन्न-भिन्न 'मैं' आज तक न समझा

कि प्रेम में पुरस्कृत हूँ या तिरस्कृत!

एक बार फिर लोगों ने मुझमें एक नए

एकलव्य को जन्म दिया, ये कहकर

कि गुरु ने दक्षिणा में प्रेम ही ले लिया...

सिगरेट चुम्बन है

 हर रात वो

लाइटर की आग से

जलाती है

कागज़ के चंद टुकड़े

और अपने मन को

समझाती है अक्सर

कि उसने जला दी अपनी

अंतिम प्रेम कविता भी;

देर तक काले टुकड़े

हवा में तैरते हैं

और उसे टीसते हैं

सिगरेट से भीगे होंठ.

मंगलवार, 31 अगस्त 2021

लिख दिया

 रेत रेत लिख दिया

देह खेत लिख दिया

उँगलियाँ कलम हुईं

श्याम श्वेत लिख दिया


तार तार मन को जब

प्यार प्यार लिख दिया

दिल के ज़ख़्म में भी

तूने शहरयार लिख दिया


धानी, लहू को करके

दिन का उतार लिख दिया

इतना दिया प्यार तुमने

के कर्जदार लिख दिया

शनिवार, 28 अगस्त 2021

प्रियतम को पहली पाती

बार-बार अधरों की लाली
शर्माती और सकुचाती,
नेह निचोड़ लिखी जब हिय से
प्रियतम को पहली पाती:

मैं अक्षर सारे भूल गयी
संकेत ही बिम्ब बने मन के,
अरज कोई और भावे न
जब बोल बने बसन तन के,
उनके संग को ढूंढ रही
उन ढाई आखर की थाती,
फिर सारा प्रेम उड़ेल लिखी
प्रियतम को पहली पाती:

काया गोकुल मन वृंदावन,
तिरछी मुस्कान है मनभावन,
अँखियाँ बन्द करूँ दिखते
बस उनके नयन लुभावन,
आभा उनकी जिनसे सुंदर
उस चाँद को देखके हर्षाती,
किरणों को कलम बनाय लिखी
प्रियतम को पहली पाती.

शुक्रवार, 27 अगस्त 2021

कच्ची मिट्टी

 कुम्हार चाक पर कच्ची मिट्टी को हाथों की थाप से गढ़ा करता था. उसके बनाये हुए घड़े लोगों में इतने पसंद किए जाते थे कि बिना वजह ही लोग लेते थे. कुछ लोग तो बस देखने ही आते थे. उनकी सबसे बड़ी विशेषता एक ओर झुका होकर भी संतुलन बनाये रखना था. कुम्हार के अंदर न तो गर्व था न ही पैसों का लालच. एक दिन एक गायक उधर से गुजरा उसे भी ये कला पसंद आयी. वो वहीं बैठकर रियाज़ करने लगा.

एक दिन उसने कुम्हार के मन में ये बात डाल दी कि उसके गीतों से ही घड़ों ने संतुलन बनाना सीखा. कुम्हार मुग्ध था गायक पर उसकी बात मानता चला गया. फिर गायक बोला कि सभी के घड़े तो टेढ़े नहीं होते फिर तुम्हारे ही क्यों? कुम्हार को अपनी खासियत ही कमी लगने लगी...गायक को सुनकर उसकी चाक पर हाथों की थाप धीरे धीरे सीधी पड़ने लगी. गायक की रुचि घड़ों में कम हुई वो चला गया और एक दिन सब की रुचि भी...अब कुम्हार घड़े नहीं बनाता गीत गाता है.

बुधवार, 25 अगस्त 2021

चिड़िया, पेड़ और प्रेम

चिड़िया पेड़ के प्रेम में इतनी मशगूल थी कि अपने पंख भूलती रही. पेड़ उसे सर्दी, गर्मी, बारिश से बचाता. अपने पत्तों की छाँव में आसरा देता. उसकी कोपलें चिड़िया को दुलारतीं. बहुत ख़ुश हुई चिड़िया और पेड़ को भी अच्छा लगा क्योंकि अब तक उसके पास सब अपने लिए आते थे मगर पहली बार चिड़िया पेड़ के लिए थी वहाँ. वो भी बहुत सारे प्यार के साथ. दोनों के प्रेम की चर्चा होने लगी. भौंरा, तितली, हवा, पर्वत सब दोनों को अलग करने की युक्ति सोचते. अब पेड़ को भी लगने लगा ये सही नहीं. चिड़िया पेड़ से और ज़्यादा प्रेम करने लगी. एक दिन एक चिड़ा ने पेड़ से मित्रता कर ली. पेड़ ने चिड़िया का भविष्य उस चिड़े के साथ सोच लिया. आकंठ पेड़ के प्रेम में डूबी चिड़िया और प्रेम करने लगी. पेड़ को उदासीन देख उसका प्रेम वेदना में बदल गया. सारे पंख झड़ गए. प्रेम की पुजारिन चिड़िया ने पेड़ की बात मानने की हामी भर दी. चिड़े के साथ पहली उड़ान भरे इससे पहले ही वो जमीन में आ गिरी. उसे पेड़ की आगोश में ज़मींदोज़ कर दिया गया.

आज तक वो पेड़ ख़ामोश खड़ा है. उसकी आवाज़ चिड़िया की मृत देह 

मेरी पहली पुस्तक

http://www.bookbazooka.com/book-store/badalte-rishto-ka-samikaran-by-roli-abhilasha.php