" ज़िन्दगी, तुम्हारे लिए!: हीर-रांझा: एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

रविवार, 8 फ़रवरी 2026

हीर-रांझा: एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

 


हीर और रांझा की कहानी को यदि हम मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण (Psychological Approach) से देखें, तो यह केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि समाज के थोपे गए नियमों और व्यक्तिगत पहचान के बीच के संघर्ष का एक गहरा अध्ययन है.


हीर-रांझा: एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

1. व्यक्तिवाद का उदय (The Awakening of Self)

धीदो रांझा अपने भाइयों द्वारा तिरस्कृत होने के बाद अपना घर छोड़ देता है। मनोवैज्ञानिक रूप से, यह एक 'Ego-death' (अहं-मृत्यु) की शुरुआत है. वह संपत्ति और सुरक्षा को त्यागकर संगीत (बांसुरी) को चुनता है, जो उसकी अंतरात्मा की पुकार है। जब वह हीर से मिलता है, तो वह उसके लिए केवल एक प्रेमी नहीं, बल्कि उसकी स्वतंत्रता का प्रतीक बन जाता है.

2. हीर: विद्रोह और स्वायत्तता

हीर उस समय के पितृसत्तात्मक समाज में एक 'विद्रोही व्यक्तित्व' है। वह सामाजिक सांचे में फिट होने से इनकार करती है. उसका रांझा से प्रेम करना वास्तव में अपनी Personal Autonomy (व्यक्तिगत स्वायत्तता) को खोजने का एक तरीका है। उसके लिए रांझा का संगीत एक ऐसी भाषा है जो समाज की कड़वाहट से परे है.

3. 'कैदो' और समाज का 'शैडो' (The Shadow Archetype)

हीर का चाचा 'कैदो' इस कहानी का सबसे जटिल मनोवैज्ञानिक पात्र है। वह ईर्ष्या और कुंठा का प्रतीक है. वह समाज के उस 'Shadow' को दर्शाता है जो दूसरों की खुशी को इसलिए नष्ट करना चाहता है क्योंकि वह खुद के जीवन में अधूरा है. कैदो का हीर पर नज़र रखना उसके अपने Repressed Desires (दमित इच्छाओं) का परिणाम है.

4. जोगी का रूप: आत्मिक परिवर्तन

जब रांझा जोगी बनता है, तो वह अपने पिछले सभी सांसारिक रिश्तों को काट देता है. यह मनोविज्ञान में 'Self-Actualization' की प्रक्रिया है। कान छिदवाना और राख मलना यह दर्शाता है कि उसने अपने 'बाहरी रूप' को पूरी तरह खत्म कर दिया है ताकि वह हीर से रूहानी तौर पर जुड़ सके.

5. अंत: विषाक्त परिवार और दुखद अंत

कहानी का दुखद अंत—जहाँ हीर को उसका परिवार जहर दे देता है—मनोविज्ञान में 'Narcissistic Family Dynamic' का उदाहरण है. परिवार के लिए 'सम्मान' (Honor) अपनी संतान के जीवन से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है. हीर की मृत्यु के तुरंत बाद रांझा का प्राण त्याग देना यह दिखाता है कि उनकी पहचान एक-दूसरे में पूरी तरह विलीन हो चुकी थी (Merged Identity).

यह कहानी सिखाती है कि जब समाज प्रेम को 'अधिकार' और 'मर्यादा' के तराजू में तौलता है, तो वह केवल दो व्यक्तियों को नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी गला घोंट देता है और इस तरह से आज भी प्रासंगिक हो उठती है जब हम समाज में यह दोहराते हुए देखते हैं.

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