शनिवार, 5 अप्रैल 2025

स्पांसर











जीवन की भूख कब रही मेरे भीतर

एक भूख से भरा जीवन रहा

इन कोमल उंगलियों पर पड़ी कठोर गाँठे

याद दिलाती रहीं ध्रुव तारे को छू लेने की ज़िद

न तो हम प्यार से बैठे कभी पास-पास

न ही पास बैठकर प्यार कर पाये

बस अपनी अपनी खिड़कियों से मापते रहे

रात का एकाकीपन


और


तब तक चलता रहेगा यह सिलसिला

जब तक चाँद करता रहेगा स्पांसर मेरे दर्द को


लेबल: , ,

9 टिप्पणियाँ:

यहां 6 अप्रैल 2025 को 7:34 pm बजे, Blogger  Priyahindivibe | Priyanka Pal ने कहा…

बहुत सुंदर

 
यहां 6 अप्रैल 2025 को 8:41 pm बजे, Blogger Anita ने कहा…

या फिर जब तक हम चाहेंगे

 
यहां 6 अप्रैल 2025 को 9:20 pm बजे, Blogger सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर

 
यहां 7 अप्रैल 2025 को 11:20 am बजे, Blogger अभिलाषा ने कहा…

बहुत आभार आपका!

 
यहां 7 अप्रैल 2025 को 11:21 am बजे, Blogger अभिलाषा ने कहा…

हाँ यह भी सही...

 
यहां 7 अप्रैल 2025 को 11:21 am बजे, Blogger अभिलाषा ने कहा…

आभार!

 
यहां 7 अप्रैल 2025 को 11:21 am बजे, Blogger अभिलाषा ने कहा…

बहुत बहुत आभार माननीय!

 
यहां 10 अप्रैल 2025 को 3:33 am बजे, Blogger Onkar ने कहा…

इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

 
यहां 10 अप्रैल 2025 को 11:57 pm बजे, Blogger अभिलाषा ने कहा…

कौन सी टिप्पणी महोदय? मैंने कुछ नहीं हटाया.

 

एक टिप्पणी भेजें

सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें [Atom]

<< मुख्यपृष्ठ