सच मत बोलो
सच दुखता है
कहा न...
तुम सुनते ही नहीं
झूठ नहीं बोल सकते
तो चुप रहो
जो सच नहीं सुन सकते
वो चीखेंगे चिल्लायेंगे
लेकिन तुम्हें सच नहीं बोलने देंगे
तुम बात करोगे सड़कों की
वो आंकड़े दिखायेंगे
और हाँ सवाल भी मत करो
सवाल ही तो बवाल है
जो सवाल नहीं करता वो मालामाल है
उन्होंने कहा, दिन है
तुम दिन कहो
ये मत कहो कि सूरज नहीं निकला
सूरज तो बादल में भी नहीं दिखता
क्या उसे रात कह देते हो?
ख़ारिज हो गयी न दलील?
जहाँ ख़ारिज होती रहती हैं बार-बार दलीलें
वहाँ दलील देने वाला ही बन जाता है दलाल
या यों कहें कि बनना पड़ता है दलाल
तो क्या वही बन जाना चाहते हो
फिर क्यों बोलते हो सच
तुम गूंगे ही अच्छे लगते हो
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